चाँदनी महल (परियों का आस्‍ताना, डेरा) बेमिसाल ईदगाह देवी मन्दिर कैराना कैराना का नवाब तालाब कैराना के इतिहास पर ऐतिहासिक भाषण


kairana ka kirana Gharane se naata




maharban ansari
 महरबान अन्‍सारी सफेद टोपी में बायीं और 
अधिकतर ईदगाह कैराना की खुली हवा और पेडों छांव में मिल जाते हैं 
के द्वारा भी  इधर ब्‍लाग पर आप कुछ डलवा सकते हैं
Mobile : 8791477582





शामली की सरकारी वेबसाइट कर रही है भेदभाव

जहां पूरे देश में इतिहास खास सोच के अनुसार बिगाड कर तैयार किया जा रहा है उससे कैराना भी अछूता नहीं रहा। भारत सरकार के नियमानुसार हर जिले के संबन्ध में उसकी वेबसाइट बनायी जाती है। शामली जिला बनने पर उसकी वेबसाइट शामली डाट एन आई सी डाट इन बनी है। इस वेबसाइट पर इस जिले के संबन्ध में जहां महत्वपूर्ण जानकारियां दी गयी है वही इलाके के इतिहास के साथ खिलवाड किया जा रहा है। जिले की देखने योग्य इमारतों मेंं कैराना के कर्ण तालाब का जिकर है जिससे स्वयं कैराना वासी भी अन्जान हैं। ज्ञात हो कि कैराना में दो मशहूर तालाब हैं देवी मन्दिर तालाब और नवाब तालाब दोनों का ही कर्ण से कोई संबन्ध नहीं। किसी मान्य लेखक या पुस्तक में यह बात नहीं मिलती, केवल इसने कहा उसने लिखा तक सिमित है। जानकारी के मुताबिक सरकारी मान्यता प्राप्त किसी भी रिसर्च में इस इलाके को महाभारत का नहीं माना गया है। जिन क्षत्रों को माना गया है वहां इस से संबन्धित योजनाएं चलती रही हैं।
क्षेत्र के धर्म स्थलों में भी कैराना की बेमिसाल खूबसूरत ईदगाह, एतिहासिक देवी मन्दिर, जैन बाग, बारादरी, नवाब तालाब आदि के जिकर ना होना अफसोस की बात है। जबकि इनके खूबसूरत चित्र भी नेट में आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।
वेबसाइट में इस क्षेत्र को केवल एक समुदाय से जोडकर दिखाना दूसरे की एतिहासिक जानकारियों को गायब कर देना जहां मौजूदा नस्ल को बुरा लगेगा वहीं यह अगली नस्लों से उसके इतिहास से अन्जान रखना उससे भी धोका होगा। इससे पहले इस क्षेत्र की जानकारियां मुज़फ्फर नगर वेबसाइट पर थी वहां भी मुगल दौर की इमारतों की लिस्ट में कैराना तालाब का नाम नहीं दिया गया था जबकी खुद मुगल बादशाह जहांगीर ने अपनी पुस्तक ‘तुज्के जहांगीर’ में इस तालाब का जिकर किया था।
हैरत की बात तो यह भी है कि जहां इस वेबसाइट को बनवाने वाले महाभारत काल तक के इतिहास की जानकारी होना साबित कर रहे हैं वहीं उनको इस क्षेत्र के विधायक का नाम तक पता नहीं, इलाके के सांसद और दो विधायक के नाम दिए गए हैं जबकि कैराना विधायक का नाम खाली छोड दिया गया है। अच्छा होता की मुज़फ्फर नगर की सरकारी वेबसाइट से अब तक हुए सांसद और विधायक की लिस्ट भी इधर डाल दी जाती।
दूसरी हैरत की बात इधर यह है कि भारत की सरकारी पहली ऐसी वेबसाइट होगी जिसमें सम्पर्क के लिए फार्म या इमेल नहीं दिया गया है। अधकारियों के दफ्तरों के टेलीफोन नंबर दिए गए हैं जहाँ की अपनी व्यस्तता के कारण कम ही मिलते होंगे। इधर मोबाइल नहीं तो ईमेल तो दिए ही जा सकते थे।
             हमारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से अपील है की इस  वेबसाइट shamli.nic.in की ओर ध्यान दें और शामली के ज़ामिन शहीद और मौलाना रहमतुल्ला कैरानवी जिन्होंने अंग्रेजों से भी मुक़ाबला किया और जिनके नाम से कैराना दूर दूर तक जाना जाता है के साथ ही कैराना के संबंध में  चित्रों सहित जानकारियां भरवाएं । उनकी आसानी के लिए इधर कैराना की इमारतों के चित्र दिए जा रहे हैं जो घूमने योग्‍य और धर्म स्‍थल भी हैं।
20 अप्रैल 2015
मुहम्‍मद उमर कैरानवी

देवी मन्दिर तालाब
ईदगाह कैराना

नवाब तालाब कैराना

नो गजा पीर



‘‘चर्चा-ए-गोश्तखोरी’’ किताब का विमोचन kairana book release

कैराना। अन्जुमन दावत इलल हक़ के सहयोगी इदारे मकतबा कुरआन अकेडमी के सहयोग से ‘‘चर्चा-ए-गोश्तखोरी’’ नामी किताब का विमोचन जामितुस्सादा के संचालक मौलाना इरफान कासमी द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उमर कैरानवी ने की। इस अवसर पर पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए उमर कैरानवी ने बताया कि यह पुस्तक हिंदू-मुस्लिमों के बीच हो रही गोश्तखोरी के सम्बंध में विभिन्न भ्रांतियों को दूर करेगी विशेष रूप से उक्त पुस्तक में आर्यसमाजी विद्वानों के प्राकृतिक, नैतिक और स्वाभाविक प्रश्नों के दिलचस्प जवाब दिए गए हैं। इस अवसर पर मौलाना आबिद रशीदी ने कहा कि कैराना की ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत समय बाद एक ऐसी पुस्तक का विमोचन किया जा रहा है जो इस विषय पर बेहद कामयाब रहेगा। यह हम सबके लिए बडे गर्व की बात है।
इस अवसर पर मौलाना मौज्जम, मौलाना हुसैन, मौलाना अरशद, समाज सेवी मुस्तकीम रामडा, मुम्बई से पधारे रेक्स रेमेडीज के मुहम्मद तोसीफ, चैधरी शराफत हुसैन आदि ने भाग लिया।

 


कर्ण नगरी आपकी एहसानमंद रहेगी

केन्‍द्र में कांग्रेस, यूपी में पिछली सरकार सपा, मौजूदा बसपा और कर्ण नगरी में लगातार 12 साल से भाजपा का एम.एल.ए. जो अब लोकसभा में आने की तैयारी में था के होते हुए भी कर्ण नगरी की दुर्दशा पर बहुत रंज होता है, जहांगीर के समय से ऐतिहासिक महत्‍व की इमारतों का ध्‍यान नहीं रखा जा रहा है, हैरत तो इस इलक्‍शन में हो रही है जिसके वोटिंग ही दो दिन बाद होनी हैं कि इस बार नेताओं ने इसके लिए कुछ करने का वादा तक नहीं किया,
महाबलि कर्ण और जहांगीर बादशाह के से अपने रिश्‍तों पर कैराना ही नहीं पूरे देश को फखर होना चाहिए था लेकिन आज यह बातें ही इसे रूसवा कर रही हैं,
आज कोई उस बाग और तालाब की दुर्दशा को आसानी से आकर नहीं देख सकता क्‍यूंकि इसका जो आसान रास्‍ता था हाईवे से एक कच्‍चा रास्‍ता तालाब तक जाता था, वह जहांगीर के समय के बाद अब पक्‍का हो रहा था, लेकिन उस रास्‍ते के दोनों तरफ एक कब्रिस्‍तान आ रहा था उनलोगों ने अपनी जमीन बताकर दीवारें खडी कर लीं, अब कितनी ही कब्रें भी दिखाई दे रही हैं जबतक इस बारें में कोई कार्यवाही होगी कब्रों की नकली और असली संख्‍या बढने से समस्‍या का समाधान निकलना मुशकिल है,
महाबलि कर्ण का इस शहर से संबंध में विस्‍तार से ''कैराना कर्ण की राजधानी थी'' नामक पोस्‍ट में दी गया है, चंद लाइन यूं हैं
कैराना में महाबली कर्ण, नकुड़ में नकुल, तथा थानाभवन में भीम आदि के शिविर थे इसी प्रकार क अक्षर से नाम प्रारम्भ होने वाले कस्बों में करनाल, कैराना, कुरूक्षेत्र, कांधला आदि में कुरूवंश के युवराज दुर्योधन ने अंगदेश बनाकर कर्ण को सौंपा था
जहांगीर बादशाह ने इस तालाब और बाग़ को देखकर आश्‍चर्यचकित होकर कहा थाः
बाग में ऐसे फल लगे पेड भी हैं जो कि गर्मी में या सर्दी में मिलते हैं, बाग में मौजूद हैं। मेवादार दरखत जो कि ईरान और ईराक में होते हैं यहाँ तक कि पिस्ता के पौधे भी सरसब्जी की शक्ल में और खुश कद और खुश बदन सर्व ,सनूबर के पेड इस किस्म के देखे कि अब तक कहीं भी ऐसे खूबी और लताफत वाले सरू नहीं देखे गये।
इस जिले DISTRICT MUZAFFARNAGAR की सरकारी वेबसाइट www.muzaffarnagar.nic.in के HISTROICAL MONUMENTS OF MUGHAL PERIOD सेक्‍शन में केवल जानसठ के इमारतें देती है, जिस इमारत का जिकर स्‍वयं मुगल बादशाह जहांगीर ने किया, उसे भी इस सेक्‍शन में स्‍थान नहीं दिया गया,

इस संबंध में आवाज़ उठाने में मैं आप की सहायता चाहता हूं, यह बात ब्‍लागों के द्वारा या आपके व्‍यक्तिगत प्रयत्‍नों से टी.वी., समाचार पत्र, पुरातत्‍व विभाग आदि तक पहुंचा सकें तो कर्ण नगरी आपकी एहसानमंद रहेगी,

settelite link nawab talab kairana

सच के लिए में और क्‍या कहूं, 2 मई 2009 की खींचे चित्र आप बोलेंगे-






-----------------------
-----------------------
-----------------------
यह लेख यहां छपने पर मित्रों की सहायता से कितने ही समाचार पत्रों (दैनिक अमन के सिपाही, दैनिक नवचेतन सत्‍याभास, दैनिक अवामे हिन्‍द, उर्दू समाचार पत्र सहाफत, हमारा समाज, और जदीद खबर) के द्वारा हम यह बात दूर तक पहुंचा सके इसके लिए हम उन सभी मित्रों और समाचार पत्रों के आभारी हैं



news with thanks
http://www.starnewsagency.in/
राष्ट्रीय दैनिक 'गंगापुत्रा टाइम्स'


चाँदनी महल (परियों का आस्‍ताना, डेरा)



मेहरबान अली कैरानवी (संवाद दाताः राष्ट्रीय सहारा हिन्‍दी ) ने पुस्‍तक 'कैराना कल और आज' के अपने लेख में लिखा है कि
चाँदनी महल
कैरानाः शामली कस्बे के बीच, भूरा कंडेला गांवों के राजबाहे की पटरी के निकट प्रसिद्ध चाँदनी महल (परियों का आस्‍ताना, आस्‍थाना,डेरा) आज वीरान होकर अपनी दूरदशा पर तो आंसु बहा रहा है लेकिन सैंकडों बरसों के बाद आज भी यहाँ पहुँचने वाले अक़ीदतमंदों को फेज़याब कर रहा है।
अकीदतमंदों का कहना है कि यहाँ जो भी सच्चे मन से आकर दरूदो पाक-फातिहा आदि कलाम पढ़ अल्लाह से इन बुजुर्गों के वसीले से दुआएं मांगता है अल्लाह उनकी मुराद ज़रूर पूरी करते हैं।
मालूम हुआ कि रात के समय में हर जुमेरात एवं पीर को यहां परियों एवं नेक रूहों की रूहानी मजलिसें भी होती हैं। इस लिए इसे परियों का डेरा भी कहा जाता है। में खुद भी यहां से फेजयाब हो चुका हूँ।


उमर कैरानवी (बायें)
..................
परियों की बातें बहुत पसंद की गई, अधिकतर यह भी जानना चाहते थे यह कैराना में किधर है, कब बना आदि, इन सब के लिए अच्‍छा होगा मेहरबान कैरानवी से कुछ परियों की बातें की जायें

Mobile: ०९८३७५६४०१३



news with thanks
http://www.starnewsagency.in/
मराठी समाचार पत्र 'उद्याचा मराठवाडा'

---

thanks mehban kairanvi .


My Facebook