चाँदनी महल (परियों का आस्‍ताना, डेरा) बेमिसाल ईदगाह देवी मन्दिर कैराना कैराना का नवाब तालाब कैराना के इतिहास पर ऐतिहासिक भाषण


शामली की सरकारी वेबसाइट कर रही है भेदभाव

जहां पूरे देश में इतिहास खास सोच के अनुसार बिगाड कर तैयार किया जा रहा है उससे कैराना भी अछूता नहीं रहा। भारत सरकार के नियमानुसार हर जिले के संबन्ध में उसकी वेबसाइट बनायी जाती है। शामली जिला बनने पर उसकी वेबसाइट शामली डाट एन आई सी डाट इन बनी है। इस वेबसाइट पर इस जिले के संबन्ध में जहां महत्वपूर्ण जानकारियां दी गयी है वही इलाके के इतिहास के साथ खिलवाड किया जा रहा है। जिले की देखने योग्य इमारतों मेंं कैराना के कर्ण तालाब का जिकर है जिससे स्वयं कैराना वासी भी अन्जान हैं। ज्ञात हो कि कैराना में दो मशहूर तालाब हैं देवी मन्दिर तालाब और नवाब तालाब दोनों का ही कर्ण से कोई संबन्ध नहीं। किसी मान्य लेखक या पुस्तक में यह बात नहीं मिलती, केवल इसने कहा उसने लिखा तक सिमित है। जानकारी के मुताबिक सरकारी मान्यता प्राप्त किसी भी रिसर्च में इस इलाके को महाभारत का नहीं माना गया है। जिन क्षत्रों को माना गया है वहां इस से संबन्धित योजनाएं चलती रही हैं।
क्षेत्र के धर्म स्थलों में भी कैराना की बेमिसाल खूबसूरत ईदगाह, एतिहासिक देवी मन्दिर, जैन बाग, बारादरी, नवाब तालाब आदि के जिकर ना होना अफसोस की बात है। जबकि इनके खूबसूरत चित्र भी नेट में आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।
वेबसाइट में इस क्षेत्र को केवल एक समुदाय से जोडकर दिखाना दूसरे की एतिहासिक जानकारियों को गायब कर देना जहां मौजूदा नस्ल को बुरा लगेगा वहीं यह अगली नस्लों से उसके इतिहास से अन्जान रखना उससे भी धोका होगा। इससे पहले इस क्षेत्र की जानकारियां मुज़फ्फर नगर वेबसाइट पर थी वहां भी मुगल दौर की इमारतों की लिस्ट में कैराना तालाब का नाम नहीं दिया गया था जबकी खुद मुगल बादशाह जहांगीर ने अपनी पुस्तक ‘तुज्के जहांगीर’ में इस तालाब का जिकर किया था।
हैरत की बात तो यह भी है कि जहां इस वेबसाइट को बनवाने वाले महाभारत काल तक के इतिहास की जानकारी होना साबित कर रहे हैं वहीं उनको इस क्षेत्र के विधायक का नाम तक पता नहीं, इलाके के सांसद और दो विधायक के नाम दिए गए हैं जबकि कैराना विधायक का नाम खाली छोड दिया गया है। अच्छा होता की मुज़फ्फर नगर की सरकारी वेबसाइट से अब तक हुए सांसद और विधायक की लिस्ट भी इधर डाल दी जाती।
दूसरी हैरत की बात इधर यह है कि भारत की सरकारी पहली ऐसी वेबसाइट होगी जिसमें सम्पर्क के लिए फार्म या इमेल नहीं दिया गया है। अधकारियों के दफ्तरों के टेलीफोन नंबर दिए गए हैं जहाँ की अपनी व्यस्तता के कारण कम ही मिलते होंगे। इधर मोबाइल नहीं तो ईमेल तो दिए ही जा सकते थे।
             हमारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से अपील है की इस  वेबसाइट shamli.nic.in की ओर ध्यान दें और शामली के ज़ामिन शहीद और मौलाना रहमतुल्ला कैरानवी जिन्होंने अंग्रेजों से भी मुक़ाबला किया और जिनके नाम से कैराना दूर दूर तक जाना जाता है के साथ ही कैराना के संबंध में  चित्रों सहित जानकारियां भरवाएं । उनकी आसानी के लिए इधर कैराना की इमारतों के चित्र दिए जा रहे हैं जो घूमने योग्‍य और धर्म स्‍थल भी हैं।
20 अप्रैल 2015
मुहम्‍मद उमर कैरानवी

देवी मन्दिर तालाब
ईदगाह कैराना

नवाब तालाब कैराना

नो गजा पीर

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