चाँदनी महल (परियों का आस्‍ताना, डेरा) बेमिसाल ईदगाह देवी मन्दिर कैराना कैराना का नवाब तालाब कैराना के इतिहास पर ऐतिहासिक भाषण


देवी मन्दिर कैराना

पानीपत-खटीमा मार्ग पर कस्बा कैराना जिला मुजफ्फर नगर (उ.प्र.) में पश्चिम की ओर एक विशाल दैवी मन्दिर जो बाला सुन्दरी मन्दिर के नाम से जाना जाता है स्थित है। उक्त विशाल मन्दिर का निर्माण लगभग 400 वर्ष पूर्व हुआ था यह मान्यता है। उक्त मन्दिर से मिली हुई मन्दिरों की एक बहुत बडी श्रंखला स्थापित है। प्रत्येक मन्दिर का अपना एक पौराणिक इतिहास है जिसका विवरण निम्न प्रकार किया गया।

इन मन्दिरों के बीच एक विशालकाय तालाब स्थित है जो प्राचीनकाल से ही दो तरफ सीढ़ियों दार घाट के रूप से बना है। यह भी माना जाता है कि कस्बा कैराना जिसका नाम महाभारत कथा के महानायक महाराजा कर्ण के नाम पर रखा गया था अपने प्राचीनतम इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन समय में उक्त मन्दिर परिसर में लगभग 300 बीघाह जमीन थी जिसमें इस समय कुछ जमीन दूसरे लोंगों ने अपने कब्जे में ले ली तथा कुछ जमीन पर शिक्षण संस्थाऐं, चिकित्सा संस्थाऐं व मन्दिरों की उक्त श्रंखला स्थापित है।मन्दिर श्री बालासुंदरी देवी जी परिसरः इस मन्दिर का निर्माण किसने कराया था केवल इतना ही जाना जाता है कि यह मन्दिर मराठाकाल में निर्मित है। इसी एकलिंगनाथ मन्दिर के पास श्री बाला सुंदरी दैवी  का एक विशाल मन्दिर है जो भारतीय सभ्यता व भवन निर्माण कला का अद्भुत व चमत्कारी प्रमाण है क्योंकि उक्त मन्दिर के गुम्बद में पाँच मन्जिलें निर्मित हैं जिन पर सिढ़ियों द्वारा ऊपर जाने का रास्ता है जो आज भी चालू अवस्था में है और सीढियों द्वारा आज भी मन्दिर के गुम्बद में चोटी पर आराम से पहुँचा जा सकता है और चोटी से आज भी यमुना के दर्शन होते हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मन्दिर अद्भुत भवन निर्माण कला की मिसाल है। क्योंकि इस तरह का मन्दिर ना तो चारों धामों में कहीं पर देखने का मिलता है।

इसके अलावा इस मन्दिर परिसर में हनुमान जी का मन्दिर स्थित है व यात्रियों के लिए आराम करने हेतु आरामदायक कक्ष बने हैं तथा मन्दिर के सामने विशालकाय तालाब स्थित है ।

देवी मन्दिर परिसर में अन्य मन्दिर श्री हनुमान जी व मन्दिर श्री भैरव बाबाजी का है जो लगभ्ग 300-400 वर्ष पुराना है जिसकी यह मान्यता है कि श्री देवी बालासुन्दरी जी के दर्शन करने के पश्चात श्री भैरव बाबा व हनुमानजी के दर्शन किये जाते है। इसी परिसर में एक शिव मन्दिर भी स्थित है। जो लगभग 100 वर्ष पूर्व निर्मित है। लगभग 200 वर्ष पूर्व निर्मित इस परिसर में श्री बाला जी महाराज व शिव परिवार व संतोषी माताजी का मन्दिर है जिनके बारे में क्षेत्रीय जनता में अटूट श्रद्धा है। मन्दिर परिसर बाबा वण्खण्डी महादेव जीः इस परिसर में प्राचीनतम शिव मन्दिर व हनुमानजी के मन्दिर व स्वयं प्रकट शिवलिंग है। प्रत्येक वर्ष दूर दराज इलाकों से श्रद्धालू लोग यहां आकर कावड द्वारा बाबा वनखण्डी महादेव जी की पूजाअर्चना करते हैं इसी परिसर में नवनिर्मित सत्संग भवन है व बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था है। इस मन्दिर का प्रबन्ध शिव सेना सनातन मंडल कैराना करता है।

देवी मन्दिर तालाबः इन सभी मन्दिरों के बीच विशाल देवी मन्दिर तालाब है जो लगभग 24 बिगह भूमि में स्थित है तथा जानिब पश्चिम व जानिब उत्तर दिशा में प्राचीनकाल से ही सिढ़ियोंदार पक्का घाट जनाना व मर्दाना बने हैं जो आज भी जीर्ण अवस्था में स्थित है तथा पूर्व और दक्षिण की ओर पक्की पटरी बनी है उक्त तालाब को भरने के लिए एक कूल-छोटी नहर राजबाहा कैराना से तालाब तक आई हुई है परन्तु कुछ स्वार्थी तत्वों ने उक्त कूल को तोडकर अपने खेतों में मिला लिया है जिस कारण उक्त तालाब से आबपाशी खत्म हो गयी है और तालाब सूख गया। टयूबवैल लगाकर तालाब को भरने का प्रयास किया परन्तु प्रयास सफल नहीं हुआ। तालाब आज भी पूरी तरह से सुखा पडा है जिससे क्षेत्र की जनता की धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचता है क्योंकि प्रत्येक वर्ष दीपावली व होली के दिन तालाब उक्त में प्राचीन समय में दीप पूजन किया जाता है। तालाब को भरने का प्रयोग पूर्व में सरकारी स्तर पर किया जा चुका है परन्तु यह प्रयास भी सफल नहीं हुआ। दक्षिण में विश्व गुरू मुनिशानन्द जी महाराज महामण्डेलश्वर जी की प्रेरणा व अनुकंपा से विशाल स
त्संग भवन निर्मित है। इस मन्दिर में प्रत्येक वर्ष सावन महीने में शिवरात्री के दिन विशाल मेले का अयोजन किया जाता है तथा श्रद्धालु हरिद्वार से कावड लाकर जल चढ़ाते हैं इसी से मिला देवी मन्दिर यानी माता मंगला वाली का मन्दिर व देवस्थान व आराजी भूमिघरी देवी मन्दिर है। इस प्रकार सारांश के रूप में यह कहा जा सकता है कि उक्त देवी मन्दिर का विशाल परिसर जिसमें उक्त सभी मन्दिर स्थित हैं एक विशाल परिसर है और सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपनी तरह का एक मात्र परिसर है जिसकी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने की जरूरत है। क्योंकि यह पानीपत-खटीमा मार्ग से जुडा होने के कारण व कैराना जैसे एतिहासिक नगर में होने के कारण जो हरियाणा की सीमा से मिला हुआ है एक अच्छा पर्यटन स्थल बन सकता है।

स्व मौ0 सलीम साप्ताहिक
‘राज गरिमा’14 मई 2001 देवी मन्दिर (पर्यटन स्थल)मराठा कालीन बाला सुन्दरी मन्दिर कर्ण नगरी
‘‘कैराना’’ का गौरव 

6 comments:

Dr. Anil Kumar Tyagi said...

भईया अपने क्षेत्र की बहुत ही अच्छी जानकारी आपने दी, लगे रहो,

अशोक मधुप said...

अच्छी जानकारी

हिंदी लिखाड़ियो की दुनिया मे आपका स्वागत । अच्छा लिखे।मां भारती का नाम रोशन करे। हजारों बधाई।

vivek ranjan shrivastava said...

स्वागत है !

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह्! आपने तो बहुत बढिया एवं रोचक जानकारी प्रदान की.
वास्तव में कैराना जैसे न जाने कितने ऎतिहासिक स्थल प्रशासन की उदासीनता के कारण उपेक्षित हैं.

SnehSaini_Kairana said...

its a nice tample

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